Close Menu
Subh MantraSubh Mantra
  • #Trending
  • देश-दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • फिल्मी-दुनिया
  • स्पोर्ट्स
  • लाइफस्टाइल
  • राशिफल
  • अन्य खबरें
Facebook X (Twitter) Instagram Threads
Subh MantraSubh Mantra
  • होम
  • देश-दुनिया
  • झारखंड
    • रांची
  • बिहार
  • फिल्मी-दुनिया
  • स्पोर्ट्स
  • लाइफस्टाइल
  • राशिफल
  • अन्य खबरें
Subh MantraSubh Mantra
  • #Trending
  • देश-दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • फिल्मी-दुनिया
  • स्पोर्ट्स
  • लाइफस्टाइल
  • राशिफल
  • अन्य खबरें
Home»देश-दुनिया»अटल बिहारी वाजपेयी: अटल विचारों का प्रतीक, संघर्षों से प्रधानमंत्री तक का प्रेरक सफर”
देश-दुनिया

अटल बिहारी वाजपेयी: अटल विचारों का प्रतीक, संघर्षों से प्रधानमंत्री तक का प्रेरक सफर”

reporter1By reporter1August 16, 2025No Comments2 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Reddit Telegram Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

नई दिल्ली : आज भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर पूरा देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। वाजपेयी जी न केवल भारतीय राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ रहे, बल्कि वे एक संवेदनशील कवि, तेजस्वी पत्रकार और समर्पित समाजसेवी भी थे। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन हर चुनौती के सामने वे ‘अटल’ खड़े रहे।

25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल जी ने ग्वालियर और कानपुर से शिक्षा ग्रहण की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव राष्ट्रवादी विचारधारा और साहित्य की ओर था। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए समाज की समस्याओं को अपनी लेखनी से उजागर करते रहे।

राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ भारतीय जनसंघ की स्थापना में भाग लेकर की। 1957 में पहली बार बलरामपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। 1977 में जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिंदी में संबोधित कर ऐतिहासिक कार्य किया।

प्रधानमंत्री के रूप में वे तीन बार देश का नेतृत्व कर चुके हैं—1996 में 13 दिन की सरकार, फिर 1998-99 में 13 महीने और अंततः 1999 से 2004 तक एक स्थिर सरकार चलाई। उनके कार्यकाल को कई ऐतिहासिक निर्णयों के लिए याद किया जाता है—1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण, 1999 का कारगिल युद्ध में नेतृत्व, लाहौर बस सेवा के जरिए शांति की पहल, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश की सड़कों का जाल बिछाना और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से गाँवों को जोड़ना।

वाजपेयी जी का योगदान सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि उनकी कविताएँ भी आज करोड़ों दिलों को प्रेरणा देती हैं—”हार नहीं मानूँगा”, “कदम मिलाकर चलना होगा” जैसी रचनाएँ उनके जुझारूपन की मिसाल हैं। वे लोकतंत्र के सच्चे संरक्षक थे, जिनका सम्मान उनके विरोधी भी करते थे।

#GoldenQuadrilateral #PokhranTest #अटलबिहारीवाजपेयी #पुण्यतिथि #पूर्वप्रधानमंत्री #भारतकेअटलपुरुष
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleरांची की ऐतिहासिक धरोहरें: बापू कुटीर से सेंट्रल जेल तक, आजादी के संघर्ष की जीवंत गाथा
Next Article बिहार में युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका: नीतीश कुमार का वादा, 5 साल में 1 करोड़ रोजगार
reporter1

Related Posts

#Trending

करुर में विजय की रैली में भगदड़, 31 की मौत की पुष्टि; बच्ची लापता, सीएम स्टालिन ने दिए जांच के आदेश

September 27, 2025
देश-दुनिया

2 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया के शेयर क्यों उछले? पीएमओ से राहत की उम्मीद बढ़ी

August 22, 2025
देश-दुनिया

ग़ाज़ा में भुखमरी की पुष्टि के बीच इसराइली मंत्री की धमकी: “हमास नहीं झुका तो ग़ज़ा शहर को कर देंगे नेस्तनाबूद”

August 22, 2025
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.