येरूशलम : ग़ाज़ा में अकाल की पुष्टि और गहराते मानवीय संकट के बीच इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर हमास ने हथियार नहीं डाले और सभी बंधकों को रिहा नहीं किया, तो ग़ज़ा शहर को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा। इस चेतावनी के साथ ही इसराइली कैबिनेट ने ग़ज़ा में एक व्यापक सैन्य अभियान को मंजूरी दे दी है, जो पहले से ही युद्ध से जूझ रहे क्षेत्र में स्थिति को और भी भयावह बना सकता है।
मध्यस्थता के प्रयासों के तहत क़तर और मिस्र ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें हमास ने 60 दिन के युद्धविराम के बदले आधे बंधकों को छोड़ने पर सहमति जताई थी। लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि बातचीत केवल उसी स्थिति में होगी जब सभी बंधकों की रिहाई और युद्धविराम इसराइल की शर्तों पर आधारित होगा।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ग़ज़ा डिविज़न मुख्यालय का दौरा कर हमास को हराने और ग़ज़ा का नियंत्रण लेने की योजना को मंजूरी दी है। वहीं रक्षा मंत्री कात्ज़ ने चेतावनी दी कि अगर हमास नहीं झुका तो ग़ज़ा को रफ़ाह और बेत हनून जैसा बना दिया जाएगा—वे शहर जो पहले ही इसराइली हमलों में तबाह हो चुके हैं।
इसराइली सेना ने यह भी घोषणा की है कि सैन्य कार्रवाई से पहले ग़ज़ा शहर से लगभग 10 लाख लोगों को हटाया जाएगा, और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मेडिकल टीमों को तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना को “स्वास्थ्य ढांचे की पूरी बर्बादी” करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताई है। मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेटर ने आरोप लगाया कि इसराइल ने योजनाबद्ध रूप से राहत सामग्री की आपूर्ति को रोका, जिससे हालात और बिगड़े। वहीं, महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अकाल को “मानवता की नाकामी” कहा है।
इस पूरी स्थिति की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी जब हमास ने इसराइल पर हमला किया, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और 251 को बंधक बनाया गया। इसके बाद इसराइल ने ग़ज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें अब तक 62,192 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 271 मौतें भुखमरी और कुपोषण के कारण हुई हैं, जिनमें 112 बच्चे शामिल हैं।

