22 सितम्बर 2025 : झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित गोंदलपुरा कोल ब्लॉक में चल रहे कथित अवैध खनन के खिलाफ जेएलकेएम के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में विजय कुमार साहू, विनय कुमार, वैद्यनाथ राय, मुजीबुरहमान अंसारी, कमलेश कुमार सिंह और अरुण कुमार शामिल थे। ज्ञापन सौंपने का उद्देश्य गोंदलपुरा में ग्रामीणों की बिना सहमति के कोयला खनन के विरोध को राज्यपाल तक पहुँचाना था।
देवेंद्र नाथ महतो ने राज्यपाल के समक्ष कहा कि झारखंड देश की 40% खनिज संपदा का धनी राज्य है, लेकिन यहां के स्थानीय रैयतों और ग्राम सभा की सहमति के बिना खनन कराना पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि “टाटा, बिड़ला, अडानी, अंबानी जैसे पूंजीपति झारखंड को अपनी बपौती न समझें, अन्यथा उन्हें राज्य से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि झारखंडी मूलवासी पूंजीपतियों की मनमानी के कारण पलायन को मजबूर हैं, और अब यह अन्याय सहन नहीं किया जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया कि मेसर्स अडानी इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को गोंदलपुरा क्षेत्र में लगभग 1268 एकड़ भूमि — जिसमें 551 एकड़ रैयती जमीन, 542 एकड़ वनभूमि और 173 एकड़ गैर-मजरूआ भूमि शामिल है — कोल खनन के लिए आवंटित की गई है, लेकिन इस पर ग्राम सभा या स्थानीय रैयतों की कोई सहमति नहीं ली गई है। देवेंद्र महतो ने आरोप लगाया कि खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उनकी संवैधानिक आवाज को दबाया जा रहा है। अब तक छह निर्दोष ग्रामीणों को जेल भेजा जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि गोंदलपुरा एक बहुफसली और उपजाऊ क्षेत्र है, साथ ही यह इलाका घने जंगलों और वन्यजीवों का आवास है। यदि खनन शुरू हुआ तो यहाँ के मानव और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों को भारी नुकसान होगा। इसलिए उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि बिना स्थानीय सहमति के खनन कार्य को तुरंत रोकने का आदेश दिया जाए।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार को लिखित रूप से अवगत कराएँगे, ताकि समस्या का समाधान संवैधानिक और न्यायोचित तरीके से निकाला जा सके।

