22 सितम्बर 2025 : पश्चिम बंगाल के झालदा क्षेत्र में उस समय राजनीतिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुदेश महतो को बंगाल पुलिस ने कोटशिला जाने से रोक दिया। श्री महतो अपनी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ हाल ही में हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने जा रहे थे। इस दौरान उन्हें रास्ते में ही रोककर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।
प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिनमें पूर्व विधायक लंबोदर महतो, ईचागढ़ से पूर्व प्रत्याशी हरेलाल महतो और पार्टी महासचिव एवं हजारीबाग लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी संजय मेहता प्रमुख थे। यह दौरा कुड़मी समाज की एसटी दर्जे की मांग को लेकर हुए आंदोलन के बाद किया जा रहा था, जिसमें कोटशिला क्षेत्र के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
घटना के बाद पार्टी महासचिव संजय मेहता ने पुरुलिया के एडिशनल एसपी से संपर्क कर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस के आदेश के बावजूद लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन स्वीकार्य नहीं है और प्रतिनिधिमंडल को पीड़ितों से मिलने दिया जाना चाहिए। बातचीत के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुदेश महतो को कोटशिला पहुँचने की सीमित अनुमति दी, लेकिन वे केवल पार्टी कार्यकर्ताओं से ही मिल सके। उन्हें पीड़ितों के गाँवों में जाने से रोक दिया गया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी प्रवक्ता संजय मेहता ने कहा कि पीड़ितों से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब आम लोग अपनी पीड़ा और समस्याएँ साझा करना चाहते हैं, तब प्रशासन उन्हें दबाने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि सुदेश महतो के कार्यक्रम की पूर्व सूचना बंगाल पुलिस को दी गई थी और बाकायदा अनुमति भी प्राप्त की गई थी। इसके बावजूद झालदा पुलिस ने मनमानी करते हुए काफिले को रोका, जो दमनात्मक रवैये को दर्शाता है।
आजसू पार्टी ने प्रशासन से माँग की है कि आंदोलन में घायल लोगों को उचित इलाज एवं मुआवजा दिया जाए और इस हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि गाँवों में पुलिस द्वारा की गई ज़्यादती की निष्पक्ष जाँच भी अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलनकारी पर दमन का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है, और आजसू पार्टी इसके खिलाफ हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि, “हमें रोक कर जनभावनाओं को नहीं रोका जा सकता। हक की लड़ाई हर मोर्चे पर लड़ी जाएगी और जनता की आवाज़ को दबाने नहीं दिया जाएगा।”

