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Home»#Trending»गुमला में जमीन बचाओ आंदोलन तेज, भारत माला रोड निर्माण के डायवर्जन पर आदिवासियों का विरोध देवेंद्र नाथ महतो बोले — ग्राम सभा की सहमति बिना जमीन अधिग्रहण असंवैधानिक
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गुमला में जमीन बचाओ आंदोलन तेज, भारत माला रोड निर्माण के डायवर्जन पर आदिवासियों का विरोध देवेंद्र नाथ महतो बोले — ग्राम सभा की सहमति बिना जमीन अधिग्रहण असंवैधानिक

reporter1By reporter1September 24, 2025No Comments2 Mins Read
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गुमला: गुमला जिले में एनएच-43 भारत माला परियोजना के तहत सड़क निर्माण को लेकर आदिवासी समुदाय का विरोध तीव्र होता जा रहा है। परियोजना के डायवर्जन और कृषि योग्य बहुफसली जमीन के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ झारखंड लोक संघर्ष मोर्चा (J.L.K.M.) के बैनर तले जमीन बचाओ आंदोलन चलाया गया, जिसका नेतृत्व केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने किया।

आंदोलन की शुरुआत हड़ताली वृक्ष परिसर से पदयात्रा के रूप में हुई, जो गुमला उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचकर धरना में बदल गई। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर उपस्थित देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि गुमला-घाघरा एनएच-43 का डायवर्जन बिना ग्राम सभा की अनुमति के किया जा रहा है, जो अनुसूचित क्षेत्र के अधिकारों और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 (संशोधित 2015) का स्पष्ट उल्लंघन है।

महतो ने बताया कि भारत सरकार के गजट संख्या 3821 (दिनांक 25 अगस्त 2022) में जिन गांवों से होकर सड़क गुजरनी थी, उन्हें दरकिनार कर निजी स्वार्थ में नए रूट से सड़क ले जाई जा रही है। इससे 19 मौजा की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है, जो आदिवासी आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ग्रामीणों की सहमति और सूचना के बिना यह अधिग्रहण किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत सरकार के गजट संख्या 3831 के अनुसार ही निर्माण कार्य नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा। फिलहाल, आंदोलनकारी डीसी कार्यालय के सभी गेट बंद कर कार्यालय में ही डटे हुए हैं। खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी वार्ता के लिए नहीं पहुंचा था।

इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। आंदोलन में शनि संदीप तिग्गा, पंचम एक्का, सलीन्द्र उरांव, अनूप फ्रांसिस कुजूर, विनय कुमार, राजेश कुमार साहू, भुनेश्वर गोप, कृष्ण चिक बाईक, मनोज चिक बाईक, बप्पी उरांव, वीरेंद्र लोहारा, सिलास बड़ा, नंदलाल पाना, मरियम एक्का, सरिता उरांव, क्रांति उरांव, बिनसौ उरांव और बिंजू उरांव सहित हजारों ग्रामीण शामिल रहे।

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