झारखंड हाईकोर्ट ने चारा घोटाले के देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की फर्जी निकासी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, बेक जूलियस और सुधीर कुमार भट्टाचार्य की सजा बढ़ाने की सीबीआई की याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले में सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा को अधिकतम करने का आग्रह किया था। सीबीआई के अधिवक्ता दीपक भारती ने अदालत में तर्क प्रस्तुत किया कि निचली अदालत ने सजा में नरमी बरती थी, जबकि लालू प्रसाद के संरक्षण में ही चारा घोटाले को अंजाम दिया गया था।
सीबीआई ने वर्ष 1996 में देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की अवैध निकासी की प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, 2017 में सीबीआई विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने दोषियों के खिलाफ फैसला सुनाया। लालू प्रसाद, बेक जूलियस, सुधीर कुमार भट्टाचार्य, आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई।
हालांकि, सीबीआई ने कोर्ट से यह आग्रह किया था कि चूंकि आरोपियों ने घोटाले को बढ़ावा दिया, इसलिए उन्हें अधिक सजा दी जानी चाहिए। खासकर लालू प्रसाद, जिनकी भूमिका इस घोटाले में अहम थी, उन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए। इस मामले में तीन दोषियों की सजा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका स्वीकार कर ली है, जबकि कुछ दोषियों की मृत्यु हो चुकी है।

