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Home»#Trending»सारण्डा अभ्यारण्य पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: सरयू राय ने सरकार से माँगा स्पष्ट फैसला, चेताया खतरे से
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सारण्डा अभ्यारण्य पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: सरयू राय ने सरकार से माँगा स्पष्ट फैसला, चेताया खतरे से

reporter1By reporter1September 30, 2025No Comments2 Mins Read
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रांची: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक श्री सरयू राय ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में सारण्डा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के मुद्दे पर राज्य सरकार की लापरवाही और खनन माफियाओं के प्रभाव पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने झारखण्ड सरकार को 08 अक्टूबर, 2025 तक अभ्यारण्य की अधिसूचना जारी करने का अंतिम मौका दिया है, अन्यथा मुख्य सचिव को जेल जाना पड़ सकता है।

श्री राय ने बताया कि 17 सितम्बर को सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि यदि सरकार 8 अक्टूबर तक सारण्डा को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित नहीं करती है, तो मुख्य सचिव को जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

इससे पहले भी 29 अप्रैल 2025 को झारखंड सरकार के वन सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को अभ्यारण्य और 13,603.80 हेक्टेयर को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं किया गया।

श्री राय ने खुलासा किया कि आज सरकार की एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति सारण्डा का दौरा कर रही है और आशंका जताई कि सरकार खनन कंपनियों के दबाव में फैसला टाल रही है।

उन्होंने बताया कि सारण्डा वन क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 85,712 हेक्टेयर है, जिसमें वर्ष 2006 के बाद से 65,679 हेक्टेयर में माइनिंग लीज के आवेदन आये, अधिकांश निजी कंपनियों के।

“ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार और कंपनियां पूरा सारण्डा लील जाना चाहती हैं,” उन्होंने कहा।

सन् 1969 में बिहार सरकार ने सारण्डा को गेम सेंक्चुअरी घोषित किया था, लेकिन झारखंड सरकार ने अब तक उस अधिसूचना को मान्यता नहीं दी।

2010 में एम.बी. शाह आयोग और 2011 में राज्य समिति ने भी अभ्यारण्य की सिफारिश की।

2020 में डॉ. आर.के. सिंह द्वारा एनजीटी में मामला लाया गया, जिसके आधार पर 2022 में अभ्यारण्य घोषित करने का आदेश दिया गया, जिसे राज्य सरकार ने नजरअंदाज कर दिया।

अंततः सुप्रीम कोर्ट में प्रो. डी.एस. श्रीवास्तव द्वारा हस्तक्षेप याचिका दायर की गई, जिस पर यह ताजा आदेश आया है।

श्री राय ने कहा कि खनन कंपनियां दावा करती हैं कि सारण्डा में 40 लाख टन लौह अयस्क है, और देश के विकास के लिए खनन आवश्यक है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया:“अब तक जिन क्षेत्रों में खनन हुआ है, वहाँ कितना विकास हुआ है? और क्या वहां के लोग वास्तव में लाभान्वित हुए हैं?”उन्होंने कहा कि खनन की तुलना में पर्यटन, वनोपज, और जैव विविधता आधारित आजीविका अधिक स्थायी और लाभकारी है।

#JharkhandForest #JharkhandPolitics #SarandaSanctuary #SaryuRai #SupremeCourtOrder
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