पटना, 6 अक्टूबर 2025 । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का औपचारिक ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है। मतदान दो चरणों में कराया जाएगा—पहला चरण 6 नवंबर, और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को कराई जाएगी। पहले चरण में राज्य की 121 विधानसभा सीटों पर और दूसरे चरण में 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। नामांकन की आखिरी तारीखें क्रमशः 17 अक्टूबर (पहला चरण) और 20 अक्टूबर (दूसरा चरण) तय की गई हैं।
चुनाव आयोग ने इस बार कई नई व्यवस्थाएँ लागू की हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मतदाता के अनुकूल हो सके। पहली बार मतदाताओं के लिए मोबाइल डिपॉजिट सुविधा शुरू की जा रही है ताकि लोग मतदान केंद्रों में अपने फोन जमा कर सकें और भीड़-भाड़ से बचा जा सके। साथ ही, पूरे राज्य में ECI Net प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे मतदान से संबंधित सूचनाएं और संचालन अधिक सुगम होंगे।
चुनाव आयोग ने यह भी घोषणा की है कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर 100% वेबकैस्टिंग की व्यवस्था की जाएगी ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, मतदान और मतगणना से जुड़े अधिकारियों को इस बार अधिक सम्मान राशि (होनोरारियम) देने की बात भी कही गई है, साथ ही उनकी सुविधाओं में भी सुधार किया गया है।
इस बार के चुनावों की एक अहम बात मतदाता सूची को लेकर है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लगभग 21.53 लाख नए मतदाता सूची में जोड़े गए हैं, जबकि 3.66 लाख नाम हटाए गए हैं। अब बिहार में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ हो गई है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि करीब 65 लाख नामों की कथित कटौती पक्षपातपूर्ण है। यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म हो चुका है। एक ओर एनडीए गठबंधन आत्मविश्वास से भरा नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन और अन्य विपक्षी दल केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से आग्रह किया था कि चुनाव छठ पूजा के बाद एक ही चरण में कराए जाएं, लेकिन आयोग ने दो चरणों में मतदान की प्रक्रिया को उपयुक्त माना है।
2025 का बिहार विधानसभा चुनाव कई मायनों में अहम है। राज्य की राजनीति में नई दिशा देने की संभावनाएं बन रही हैं। पारदर्शिता, तकनीकी पहल, मतदाता सूची का सुधार और दो चरणों में मतदान इस चुनाव को पिछले चुनावों से अलग बना रहे हैं। आगामी हफ्तों में चुनावी माहौल और तेज़ हो जाएगा, जहां प्रचार, गठबंधन और रणनीति अपने चरम पर होगी।

